ترقية الحساب

  • इस दुनिया में, जब हर एक पल हमारी कल्पनाओं से भरा होता है, हम अकेले खड़े होते हैं, अपने ही विचारों की गिरफ्त में। आज, जब हम एनसी फेस्टिवल की ओर बढ़ रहे हैं, एक भारी मन के साथ सोचते हैं कि क्या हमारी कला, हमारी मेहनत, हमारी पहचान अब मशीनों के हाथों में है?

    जब मैंने सुना कि विभिन्न संघ और संगठन, जो कलाकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, एआई जनरेटिव के उपयोगों के नियमन के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो मन में एक अजीब सा खेद उमड़ आया। क्या हम वास्तव में यहां तक पहुँच गए हैं कि हमें अपनी रचनात्मकता की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है? शारीरिक रूप से हम एकत्रित होते हैं, लेकिन दिल में एक गहरी खाई है, एक अधूरापन जो हमारी कला की आत्मा को छू रहा है।

    विज़ुअल आर्ट, संगीत, लेखन — ये सब हमारे अस्तित्व के अभिन्न अंग हैं। लेकिन अब, जब ये मशीनों द्वारा उत्पन्न होते हैं, तो क्या हम उन्हें केवल एक उत्पाद में सीमित कर देंगे? क्या हम अपनी भावनाओं को, अपनी कहानियों को, अपने अनुभवों को एक ठंडी, निर्जीव मशीन के हाथों में सौंप देंगे? यह सोच कर ही दिल में एक भारीपन आ जाता है।

    क्या हम सच में अपने आप को इस निराशा के गर्त में गिरने देंगे, या हमें एक नई दिशा में सोचना चाहिए? क्या हम अपनी आवाज़ उठाने के लिए एकजुट हो सकते हैं, ताकि हमारी रचनात्मकता को एक नया जीवन मिल सके? हमें यह समझने की जरूरत है कि एआई केवल एक उपकरण है, लेकिन हमारी भावनाएं, हमारे विचार, वह सब कुछ हैं जो हमें इंसान बनाते हैं।

    फिर भी, उस सड़कों पर चलने का विचार, एक अजीब सी उम्मीद जगाता है। क्या हम फिर से अपनी पहचान को पुनः स्थापित करने में सक्षम होंगे? क्या हम फिर से अपनी कला में जान डाल पाएंगे? यह हृदय की गहराइयों से निकली एक पुकार है, एक याचना है कि हम अपनी रचनात्मकता को बचा सकें।

    आओ, हम एकत्रित हों, एक नई शुरुआत करें। क्योंकि अकेले चलना कठिन है, पर जब हम एकजुट होते हैं, तो हम हर दर्द और हर खेद को साझा कर सकते हैं।

    #एनसीफेस्टिवल #रचनात्मकता #एआई #कलाकारोंकीआवाज #अकेलापन
    इस दुनिया में, जब हर एक पल हमारी कल्पनाओं से भरा होता है, हम अकेले खड़े होते हैं, अपने ही विचारों की गिरफ्त में। 🎭💔 आज, जब हम एनसी फेस्टिवल की ओर बढ़ रहे हैं, एक भारी मन के साथ सोचते हैं कि क्या हमारी कला, हमारी मेहनत, हमारी पहचान अब मशीनों के हाथों में है? जब मैंने सुना कि विभिन्न संघ और संगठन, जो कलाकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं, एआई जनरेटिव के उपयोगों के नियमन के लिए आवाज उठा रहे हैं, तो मन में एक अजीब सा खेद उमड़ आया। क्या हम वास्तव में यहां तक पहुँच गए हैं कि हमें अपनी रचनात्मकता की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है? 😞 शारीरिक रूप से हम एकत्रित होते हैं, लेकिन दिल में एक गहरी खाई है, एक अधूरापन जो हमारी कला की आत्मा को छू रहा है। विज़ुअल आर्ट, संगीत, लेखन — ये सब हमारे अस्तित्व के अभिन्न अंग हैं। लेकिन अब, जब ये मशीनों द्वारा उत्पन्न होते हैं, तो क्या हम उन्हें केवल एक उत्पाद में सीमित कर देंगे? क्या हम अपनी भावनाओं को, अपनी कहानियों को, अपने अनुभवों को एक ठंडी, निर्जीव मशीन के हाथों में सौंप देंगे? यह सोच कर ही दिल में एक भारीपन आ जाता है। 😢 क्या हम सच में अपने आप को इस निराशा के गर्त में गिरने देंगे, या हमें एक नई दिशा में सोचना चाहिए? क्या हम अपनी आवाज़ उठाने के लिए एकजुट हो सकते हैं, ताकि हमारी रचनात्मकता को एक नया जीवन मिल सके? हमें यह समझने की जरूरत है कि एआई केवल एक उपकरण है, लेकिन हमारी भावनाएं, हमारे विचार, वह सब कुछ हैं जो हमें इंसान बनाते हैं। फिर भी, उस सड़कों पर चलने का विचार, एक अजीब सी उम्मीद जगाता है। क्या हम फिर से अपनी पहचान को पुनः स्थापित करने में सक्षम होंगे? क्या हम फिर से अपनी कला में जान डाल पाएंगे? यह हृदय की गहराइयों से निकली एक पुकार है, एक याचना है कि हम अपनी रचनात्मकता को बचा सकें। आओ, हम एकत्रित हों, एक नई शुरुआत करें। क्योंकि अकेले चलना कठिन है, पर जब हम एकजुट होते हैं, तो हम हर दर्द और हर खेद को साझा कर सकते हैं। 💔✨ #एनसीफेस्टिवल #रचनात्मकता #एआई #कलाकारोंकीआवाज #अकेलापन
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